अडवानी-मुरली घर मेँ बैठे
कौन करे सुनवाई,
इस उम्र मेँ आकर देखो
हो गई जग हसाई।
सलाहकार मण्डल के नेता
कोई ना लेवे सलाह,
इतना सुंदर करियर था
जो हो गया अब तबाह।
इतने साल की चुप्पी भी
कोई काम ना आई,
अडवानी-मुरली घर मेँ बैठे
कौन करे सुनवाई।
बिन कुर्सी के कैसे नेता
किस किस को बतलाए,
दिन मेँ रहे बेचैनी सी और
रात को नींद ना आए।
कुर्सी छिन जाए उन लोगों की
जिसने ये गत बनाई,
लेन-देन को कुछ भी नहीं है
खाली करो हताई।
[गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर]