वार्ड मेँ सफाई नहीं, पत्रकार को बोल दो।
स्ट्रीट लाइट नहीं है, पत्रकार को बता दिया।
मोहल्ले मेँ देर रात तक आवारागर्दी, पत्रकार को सूचना दो।
गैस नहीं मिल रही….पत्रकार को फोन करो।
पुलिस मेँ सुनवाई नहीं, पत्रकार को बताओ।
प्रशासन बात नहीं सुनता, पत्रकार की मदद लो।
अन्याय है, प्रताड़ना है, गली की बात है, सरकार का मुद्दा है
कुछ भी ऐसा नहीं जहां आज के दिन मीडिया/पत्रकार की जरूरत ना होती हो
बेशक सोशल मीडिया का महत्व है
लेकिन पत्रकार की विश्वसनीयता का महत्व
लोकतन्त्र के सभी स्तंभों मेँ है। इसलिए
अच्छे/सच्चे मीडिया/पत्रकार का संरक्षण समाज को करना ही चाहिए….
वरना आम आदमी की आवाज बुलंद करने वाला कोई नहीं बचेगा….
[गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर]